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Uddhav Thackeray को झटका, BMC Mayor Reservation Lottery से महायुति मजबूत

Mumbai की राजनीति में लंबे समय से बना हुआ सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) के मेयर पद को लेकर जारी आरक्षण लॉटरी ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में सत्ता का संतुलन किस ओर झुकने वाला है। इस फैसले से जहां Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली Shiv Sena (UBT) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, वहीं BJP के नेतृत्व वाली महायुति की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा समीकरणों को देखते हुए अब BMC का अगला मेयर महायुति से ही बनेगा।

BMC Mayor Reservation Lottery से महायुति मजबूत

BMC देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर नगर निगमों में से एक मानी जाती है। इसका बजट कई राज्यों से भी बड़ा होता है, इसलिए यहां का मेयर पद केवल एक औपचारिक संवैधानिक पद नहीं बल्कि राजनीतिक ताकत और भविष्य की दिशा तय करने वाला केंद्र भी माना जाता है। इसी वजह से हर बार BMC के मेयर चुनाव पर पूरे महाराष्ट्र की राजनीति की नजर टिकी रहती है।

नए आरक्षण नियमों ने बदला पूरा खेल

इस बार BMC मेयर पद के लिए आरक्षण को लेकर जो सबसे अहम बदलाव सामने आया है, वह नया नियम है। इस नियम के अनुसार किसी भी आरक्षण श्रेणी को तभी लागू किया जाएगा, जब उस श्रेणी के कम से कम तीन निर्वाचित सदस्य महानगरपालिका के सदन में मौजूद हों। यदि किसी कैटेगरी में तीन सदस्य नहीं हैं, तो उस कैटेगरी के लिए आरक्षण मान्य नहीं होगा। यही नियम इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की जड़ बन गया है।

इस नियम का सीधा असर Scheduled Tribe (ST) आरक्षण पर पड़ा है। BMC के मौजूदा सदन में ST कैटेगरी के केवल दो ही सदस्य हैं, जबकि नियम के अनुसार कम से कम तीन सदस्यों का होना जरूरी है। इसी वजह से ST आरक्षण को BMC मेयर पद के लिए लागू नहीं किया गया। यही फैसला विपक्ष के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ।

ST आरक्षण हटते ही महायुति को फायदा

ST आरक्षण के लागू न होने के बाद अब आरक्षण लॉटरी में जिन भी कैटेगरी के नाम आने की संभावना है, उन सभी श्रेणियों में BJP और महायुति के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। इसका मतलब साफ है कि लॉटरी में चाहे जिस भी कैटेगरी का आरक्षण निकले, मेयर पद पर महायुति का उम्मीदवार ही बैठने की स्थिति में होगा।

BJP, Eknath Shinde की Shiv Sena और Ajit Pawar की NCP से मिलकर बनी महायुति पहले से ही BMC में मजबूत मानी जा रही है। आरक्षण लॉटरी के इस फैसले ने उस मजबूती को लगभग निश्चित जीत में बदल दिया है। यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में अब यह कहा जाने लगा है कि मेयर चुनाव केवल औपचारिकता भर रह गया है।

Uddhav Thackeray के लिए क्यों है यह बड़ा झटका

Uddhav Thackeray और उनकी पार्टी Shiv Sena (UBT) के लिए BMC हमेशा से सत्ता और पहचान का सबसे बड़ा आधार रही है। दशकों तक BMC पर Shiv Sena का दबदबा रहा और यही नगर निगम पार्टी की जमीनी ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती थी। लेकिन 2022 के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम, पार्टी में टूट और सत्ता परिवर्तन ने Uddhav Thackeray की स्थिति को काफी कमजोर कर दिया।

आरक्षण लॉटरी के इस फैसले ने उनकी बची-खुची उम्मीदों को भी बड़ा झटका दिया है। यदि ST या किसी ऐसी कैटेगरी के लिए आरक्षण लागू होता, जिसमें Shiv Sena (UBT) की मजबूत मौजूदगी होती, तो मुकाबला कड़ा हो सकता था। लेकिन नए नियमों और संख्या बल के अभाव में अब उनके लिए मेयर पद हासिल करना लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है।

BMC Mayor Reservation Lottery से महायुति मजबूत

अन्य नगरपालिकाओं में आरक्षण का असर

BMC के साथ-साथ महाराष्ट्र की अन्य नगरपालिकाओं में भी मेयर पद के लिए आरक्षण तय किया गया है। Kalyan-Dombivli Municipal Corporation में मेयर पद के लिए ST आरक्षण लागू होगा, क्योंकि वहां ST कैटेगरी के आवश्यक सदस्य मौजूद हैं। वहीं Jalna, Thane और Latur नगरपालिकाओं में Scheduled Caste (SC) आरक्षण के तहत मेयर चुना जाएगा। इन नगरपालिकाओं में आरक्षण के फैसले से वहां की स्थानीय राजनीति जरूर प्रभावित होगी, लेकिन BMC के मुकाबले इनका राजनीतिक महत्व सीमित माना जाता है। फिर भी, ये फैसले आने वाले समय में महाराष्ट्र की शहरी राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

आरक्षण लॉटरी के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। महायुति के नेताओं ने इसे पूरी तरह नियमों के तहत लिया गया पारदर्शी फैसला बताया है और कहा है कि लोकतंत्र में संख्या बल और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि नए नियमों ने उनकी राजनीतिक संभावनाओं को सीमित कर दिया है। हालांकि प्रशासन और चुनावी अधिकारियों की ओर से यह साफ किया गया है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ है।

आगे की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर

BMC मेयर पद पर महायुति का कब्जा केवल एक नगर निगम की जीत नहीं मानी जा रही है। इसे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि महायुति BMC में स्थायी समिति और अन्य अहम पदों पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर लेती है, तो इसका सीधा असर पूरे Maharashtra की राजनीति पर पड़ेगा। BMC जैसे बड़े नगर निगम में सत्ता हासिल करना किसी भी गठबंधन के लिए राजनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन होता है, और यही वजह है कि यह जीत महायुति के आत्मविश्वास को और बढ़ा सकती है।

निष्कर्ष

BMC Mayor Reservation Lottery ने यह साफ कर दिया है कि नए नियमों और संख्या बल के दौर में राजनीति किस तरह करवट ले रही है। ST आरक्षण के लागू न होने से Uddhav Thackeray को बड़ा झटका लगा है, जबकि BJP के नेतृत्व वाली महायुति के लिए मेयर पद की राह लगभग साफ हो चुकी है। आने वाले दिनों में BMC की सत्ता पर महायुति का कब्जा Maharashtra की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे, धन्यवाद।

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