Delhi के Sangam Vihar इलाके में शनिवार, 29 नवंबर की शाम को उस समय हड़कंप मच गया जब तिगड़ी एक्सटेंशन की एक चार मंजिला रिहायशी इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। यह आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग घने धुएं से भर गई और ऊपर की मंजिलों में फंसे लोग बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं ढूंढ पाए।
शुरुआत में स्थानीय लोगों को लगा कि शायद आग छोटी है और जल्द ही बुझ जाएगी, लेकिन जैसे-जैसे लपटें तेज होती गईं, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। लोग घबराए हुए इमारत से बाहर भागने लगे और जो लोग फंस गए, वे खिड़कियों और बालकनी के पास जाकर मदद का इंतजार करते दिखाई दिए। इस घटना ने इलाके के लोगों को दहशत में डाल दिया और अचानक पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे की शुरुआत कैसे हुई? पूरा घटनाक्रम
लोगों का कहना है कि आग की शुरुआत बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर से हुई, जहां एक शू शॉप चलाई जाती थी। बताया जा रहा है कि दुकान के अंदर रखा ज्वलनशील सामान, जैसे- शू पॉलिश, ग्लू और पैकिंग मटेरियल आग पकड़ने के बाद तेजी से धधकने लगा। शुरुआत में धुआँ ग्राउंड फ्लोर पर जमा हुआ और धीरे-धीरे ऊपर की ओर फैलता चला गया। कुछ ही मिनटों में दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहने वाले लोग धुएं के कारण सांस लेने में असमर्थ हो गए।
धुआँ इतना घना था कि उन्हें अपने कमरे से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। कई लोगों ने खिड़कियों से बाहर झुककर हवा लेने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें और गर्मी के कारण खिड़कियों से भी बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया। इस बीच लोगों ने हड़कंप में स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग को फोन कर मदद भी मांगी।
दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही पास के फायर स्टेशनों को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया और देखते ही देखते दमकल विभाग की करीब 10 गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। लेकिन Sangam Vihar की संकरी गलियाँ रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बन गईं। दमकल गाड़ियों को अंदर तक पहुँचने में काफी समय लग गया और इस दौरान आग और भी ज्यादा फैल चुकी थी।
दमकल कर्मियों ने इमारत की बाहरी दीवारों से पानी की मोटी धारें मारकर आग को नियंत्रित करने की कोशिश की, जबकि विशेष रेस्क्यू टीमों को अंदर भेजकर फंसे हुए लोगों तक पहुँचने का प्रयास किया गया। आग इतनी तेज थी कि एक समय पर ऐसा लग रहा था कि पूरी बिल्डिंग ढह सकती है, लेकिन फायर ब्रिगेड ने लगातार 2 घंटे की कोशिशों के बाद किसी तरह आग पर काबू पा लिया।
3 लोगों की मौत और 2 लोग गंभीर रूप से घायल
आग पर काबू पाने के बाद जब रेस्क्यू टीमें बिल्डिंग के अंदर पहुंचीं, तो वहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था। कुछ लोग दरवाजे के पास ही बेहोशी की हालत में मिले, जबकि कुछ लोग बाथरूम में छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते पाए गए। धुएं के कारण दम घुटने से तीन लोगों की मौत हो चुकी थी। उनके शवों को बाहर निकालते समय स्थानीय लोग और पुलिसकर्मी भी भावुक हो उठे।
इसके अलावा, दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनका इलाज जारी है और उनकी हालत अभी चिंताजनक बनी हुई है। पुलिस मृतकों की पहचान की प्रक्रिया में जुटी हुई है और घायलों से बयान भी दर्ज करने की तैयारी हो रही है ताकि घटना की सही वजह का पता लगाया जा सके।
पुलिस की जांच जारी
पुलिस और फॉरेंसिक टीम इस बात की जांच कर रही है कि आग आखिर लगी कैसे। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि शू शॉप में भारी मात्रा में इलेक्ट्रिक लाइटिंग और वायरिंग की गई थी। हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि दुकान में एक छोटा गैस सिलेंडर भी रखा हुआ था, जो आग लगने के बाद फट गया और लपटें अचानक तेज हो गईं।
फिलहाल, पुलिस ने दुकान मालिक और मकान मालिक दोनों से पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या बिल्डिंग में फायर सेफ्टी का कोई प्रबंध था या नहीं, क्योंकि शुरुआती नजर में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बिल्डिंग में ना तो फायर अलार्म था और ना ही कोई आपातकालीन फायर एग्जिट।
Sangam Vihar की फायर सेफ्टी की कमी ने बढ़ाया खतरा
इस घटना ने एक बार फिर Delhi की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। Sangam Vihar जैसे घनी आबादी वाले इलाके में फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ अंदर तक पहुँच नहीं पातीं, जिससे आग तेजी से फैल जाती है और लोगों को बचाना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इलाके में कई बिल्डिंग्स बिना फायर NOC और बिना सेफ्टी उपकरणों के बनाई गई हैं। अवैध निर्माण की भरमार और बिजली की ओवरलोडिंग अक्सर ऐसे हादसों को न्योता देती है। प्रशासन को कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई न होने के कारण यह हादसा एक बड़ी लापरवाही के रूप में सामने आया है।
निष्कर्ष
Sangam Vihar की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक चेतावनी है। यह दर्शाता है कि अगर फायर सेफ्टी के नियमों को सही से लागू नहीं किया गया, अगर अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगी, और अगर भवनों में फायर अलार्म, फायर एग्जिट, उचित वायरिंग जैसी जरूरी चीजें नहीं जोड़ी गईं, तो ऐसी घटनाएँ आगे भी होती रहेंगी।
Delhi जैसे बड़े शहर में हर घर, हर दुकान और हर सोसायटी में बेसिक फायर सेफ्टी होना जरूरी है। यह सिर्फ एक कानूनी नियम नहीं, बल्कि जान बचाने का साधन है। ऐसे हादसों से सीख लेकर प्रशासन और जनता दोनों को जागरूक होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई परिवार इस तरह की घटना का शिकार न बने।
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