Delhi में बुधवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि शाम होते ही राजधानी की सड़कों, मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों पर वैसी ही रौनक दिखाई दी जैसी दिवाली के पवित्र अवसर पर देखने को मिलती है। यह रौनक किसी त्योहार के कैलेंडर के मुताबिक नहीं आई, बल्कि इसलिए आई क्योंकि UNESCO ने दिवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक सूची में शामिल कर लिया है।
इस फैसले ने न केवल भारत के लोगों में गर्व की भावना जगाई, बल्कि दिल्लीवासियों ने इस खुशी को एक सामूहिक उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया। हर तरफ रोशनी के प्रतीक दीप जल उठे, मंदिरों में घंटियों की ध्वनि गूंजने लगी और सोशल मीडिया पर दिवाली जैसे चमकते दृश्य वायरल हो गए।
UNESCO की घोषणा ने बदली Delhi की शाम
UNESCO द्वारा दिवाली को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का अर्थ केवल इतना नहीं है कि इसे दुनिया ने एक त्योहार के रूप में स्वीकार कर लिया, बल्कि इसका मतलब यह भी है कि अब इसे एक ऐसी सांस्कृतिक पहचान प्राप्त हो गई है, जो पूरी मानव सभ्यता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस फैसले के बाद Delhi में लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
शाम ढलते ही मंदिरों और सार्वजनिक जगहों पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी, जहाँ हर कोई इस ऐतिहासिक निर्णय के जश्न में दीप जला रहा था। यह दृश्य इतना अद्भुत था कि ऐसा लगा मानो किसी ने पूरे शहर पर एक बार फिर दिवाली की चमक बिखेर दी हो। लोगों ने इस अवसर को सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति के उत्सर्जन के रूप में मनाया।
CM Rekha Gupta ने कैबिनेट के साथ किया दीप प्रज्वलन
इस पूरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा क्षण वह रहा जब Delhi की मुख्यमंत्री Rekha Gupta मंच पर पहुंचीं और मंत्रियों के साथ मिलकर दीप प्रज्वलन किया। मंच पर उपस्थित भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस क्षण का स्वागत किया। दीप जलाते हुए CM Rekha Gupta ने कहा कि दिवाली को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना भारत की सांस्कृतिक विरासत की जीत है, जो दुनिया को यह संदेश देती है कि भारतीय परंपराएं धरती पर सकारात्मकता, शांति और मानवता का प्रकाश फैलाती हैं।
उनके भाषण के बाद पूरा मंच रोशनी से जगमगा उठा और उपस्थित लोग इस क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखाई दिए। मंत्रीगण और अधिकारियों ने भी इसे ‘भारत की सांस्कृतिक पहचान के स्वर्ण अध्याय’ की शुरुआत बताया। कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद Delhi में NCR के प्रमुख मंदिरों में रंग-बिरंगी लाइटिंग और दीयों से सजावट की गई। Akshardham Temple, Chhatarpur Temple, Birla Mandir, और Jhandewalan Temple में भारी संख्या में भक्त पहुंचे। वहाँ विशेष पूजा-अर्चना की गई, भजन और कीर्तन गाए गए, और हजारों दीयों की रोशनी से मंदिर परिसर ऐसे जगमगा रहे थे जैसे वास्तविक दिवाली की रात हो।
मंदिरों के प्रवेश द्वार पर बनी विशाल रंगोलियाँ हर आगंतुक का ध्यान खींच रही थीं। कई परिवार इस अनोखे जश्न में बच्चों को साथ लेकर आए, क्योंकि वे इस ऐतिहासिक उपलब्धि का हिस्सा बनना चाहते थे। यह दृश्य ऐतिहासिक था, लोगों की आस्था और उत्साह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दिवाली न सिर्फ त्योहार है, बल्कि भारतीय भावनाओं का धड़कता हुआ प्रतीक है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत का गर्व
कार्यक्रम में जो चीज सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रही, वह था UNESCO का आधिकारिक प्रमाणपत्र, जिसे भारत को सौंपा गया है। इस प्रमाणपत्र को बड़ी सावधानी से मंच पर लाया गया और विशेष रोशनी में प्रदर्शित किया गया। जैसे ही यह प्रमाणपत्र दर्शकों के सामने आया, हॉल तालियों से गूंज उठा।
लोगों में इस बात को लेकर गर्व की भावना स्पष्ट दिख रही थी कि आज भारत की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर एक और उच्च स्थान मिल गया है। यह प्रमाणपत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उस विरासत की पहचान है जिसे भारत सदियों से दुनिया तक पहुँचाने की कोशिश करता रहा है। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो कुछ ही घंटों में वायरल हो गए।
लोग दीयों की कतारें, मंदिरों की जगमगाहट और CM Rekha Gupta के दीप प्रज्वलन की तस्वीरें लगातार साझा करते रहे। हजारों लोगों ने इस फैसले को भारत की सांस्कृतिक जीत बताया और महसूस किया कि आज देश की परंपराओं को वह वैश्विक सम्मान मिला है जिसके वे हकदार हैं।
निष्कर्ष
UNESCO द्वारा दिवाली को सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया जाना एक ऐसा अध्याय है जिसे भारतीय संस्कृति हमेशा अपने स्वर्णिम क्षणों में गिनती रहेगी। Delhi में मनाया गया यह भव्य उत्सव केवल एक कलात्मक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा आयोजन था जिसने दुनिया को दिखाया कि भारत अपनी विरासत को कितनी शिद्दत से संजोता है। CM Rekha Gupta द्वारा किया गया दीप प्रज्वलन इस दिन का प्रतीक बन गया की एक दीप जिसने न केवल Delhi, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चमक को और अधिक उजागर किया।
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