भारत को Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने में विज्ञान और रक्षा अनुसंधान की भूमिका को केंद्र में रखते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। कार्मिक प्रतिभा प्रबंधन केंद्र के नेतृत्व में DRDO के Corporate Cluster की संस्थाओं द्वारा दो दिवसीय Rajbhasha Scientific & Technical Seminar का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विषय है कि “Viksit Bharat 2047 DRDO ka Scientific aur Technical Yogdan”।
यह आयोजन न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हिंदी में उच्च स्तरीय तकनीकी विमर्श को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
DRDO Corporate Cluster की संयुक्त पहल
इस संगोष्ठी का आयोजन DRDO के Corporate Cluster की प्रमुख इकाइयों में Recruitment & Assessment Centre (RAC), Institute of Technology Management (ITM), मुख्यालय के सभी निदेशालय, सभी CCE और सभी EMU के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह तथ्य इस कार्यक्रम को विशेष महत्व देता है क्योंकि इसमें संगठन के प्रशासनिक, तकनीकी और अनुसंधान संबंधी सभी आयामों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।
DRDO, जो भारत की रक्षा तकनीक के स्वदेशीकरण में अग्रणी संस्था है, लंबे समय से missile systems, radar technology, electronic warfare, aerospace platforms, combat vehicles और advanced materials जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देता रहा है। ऐसे में Viksit Bharat 2047 की परिकल्पना के संदर्भ में इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की उपस्थिति
संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में Agricultural Scientists Recruitment Board (ASRB) के अध्यक्ष Dr. Sanjay Kumar ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में Dr. Manoranjan Patri, अध्यक्ष, SEPTAM Shri Vipin Kaushik, Outstanding Scientist एवं Director, Rajbhasha, Sansad & Public Relations Directorate तथा Shrimati Sunita Vadera, Scientist ‘G’ एवं Director, SEPTAM उपस्थिति रहीं।
इन वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि यह संगोष्ठी केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि नीति स्तर पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भाषा सशक्तिकरण को जोड़ने का प्रयास है। DRDO जैसे रणनीतिक संगठन में Rajbhasha के माध्यम से technical discourse को बढ़ावा देना प्रशासनिक पारदर्शिता और ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
26 Laboratories से 90 Research Papers Scientific Depth का प्रमाण
इस दो दिवसीय संगोष्ठी में DRDO की 26 laboratories से कुल 90 research papers और technical articles प्राप्त हुए हैं। यह संख्या इस आयोजन के व्यापक दायरे और वैज्ञानिक गहराई को दर्शाती है।
DRDO की प्रयोगशालाएं देशभर में फैली हुई हैं और वे aeronautics, armaments, naval systems, life sciences, cyber systems और artificial intelligence applications in defence जैसे विविध क्षेत्रों में कार्य करती हैं। इन सभी विषयों पर हिंदी में शोधपत्र प्रस्तुत किए जाना अपने आप में एक उल्लेखनीय पहल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैज्ञानिक अपने जटिल शोध कार्य को मातृभाषा या राजभाषा में प्रस्तुत करते हैं, तो वह ज्ञान अधिक सुलभ और व्यापक बनता है। इससे तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भाषा आधारित बाधाएं कम होती हैं, जो Viksit Bharat 2047 जैसे दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए आवश्यक है।
Rajbhasha और High Tech Research का समन्वय
भारत में लंबे समय से यह बहस रही है कि क्या उच्च स्तरीय वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान केवल English में ही प्रभावी रूप से किया जा सकता है। DRDO की यह संगोष्ठी इस धारणा को चुनौती देती नजर आती है।
Rajbhasha Scientific & Technical Seminar के माध्यम से DRDO यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि innovation, research excellence और language empowerment साथ-साथ चल सकते हैं।
यह पहल ‘Atmanirbhar Bharat’ और ‘Make in India’ जैसी राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप भी है, जहां स्वदेशी तकनीक के साथ-साथ स्वदेशी अभिव्यक्ति को भी महत्व दिया जा रहा है। यदि वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली को हिंदी में व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए, तो यह भविष्य में defence manufacturing, R&D collaboration और academic partnerships के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है।
Viksit Bharat 2047 Vision से Execution की ओर
Viksit Bharat 2047 केवल एक नीतिगत नारा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय roadmap है जिसमें defence preparedness, technological sovereignty और innovation ecosystem को केंद्रीय भूमिका दी गई है। DRDO का यह आयोजन इसी व्यापक vision का हिस्सा माना जा सकता है।
जब 26 laboratories से आए वैज्ञानिक अपने research findings, prototypes, system designs और experimental results को साझा करते हैं, तो यह केवल एक अकादमिक अभ्यास नहीं होता, बल्कि policy formulation, strategic planning और future defence capabilities के लिए input तैयार करता है।
इस संगोष्ठी के माध्यम से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि DRDO अपने वैज्ञानिक योगदान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे राष्ट्रीय विकास के व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना चाहता है।
निष्कर्ष
Viksit Bharat 2047 DRDO ka Scientific aur Technical Yogdan के विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय Rajbhasha Scientific & Technical Seminar भारत के defence research landscape में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
26 laboratories से प्राप्त 90 research papers इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का defence innovation ecosystem मजबूत आधार पर खड़ा है। साथ ही, हिंदी में तकनीकी विमर्श को बढ़ावा देकर DRDO ने यह संकेत दिया है कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता और भाषा सशक्तिकरण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते भारत के लिए यह पहल केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि ज्ञान, नीति और राष्ट्रीय संकल्प का संगम है, जो आने वाले वर्षों में भारत की वैज्ञानिक पहचान को और सशक्त बना सकता है।
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