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राष्ट्रपति भवन में At Home Ceremony, एरी रेशम शॉल से हुआ अतिथियों का पारंपरिक स्वागत

77वें Republic Day की संध्या पर राष्ट्रपति भवन का माहौल एक बार फिर भारतीय परंपरा, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव से सराबोर नजर आया। इस खास अवसर पर भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक ‘At Home Ceremony’ की मेजबानी की। यह समारोह हर वर्ष Republic Day के मौके पर आयोजित किया जाता है और देश की विविधता, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक एकता को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इस वर्ष का At Home Ceremony विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और व्यंजनों को समर्पित रहा, जिसने इसे और भी खास बना दिया।

राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक ‘At Home Ceremony’

राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस प्रतिष्ठित समारोह में देश के कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए। इनमें वरिष्ठ राजनेता, सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारी, न्यायपालिका से जुड़े प्रतिनिधि, राजनयिक, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियां और समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। सभी अतिथियों का स्वागत पारंपरिक और गरिमामय अंदाज में किया गया, लेकिन इस बार स्वागत की सबसे खास पहचान बनी एरी रेशम से बनी शॉल, जिसे सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।

एरी रेशम शॉल से हुआ पारंपरिक और खास स्वागत

इस वर्ष ‘At Home Ceremony’ में अतिथियों को जो शॉल भेंट की गई, वह केवल एक औपचारिक उपहार नहीं थी, बल्कि उसके पीछे एक गहरा सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश छिपा हुआ था। Eri Silk, जिसे आमतौर पर ‘Peace Silk’ यानी ‘शांति रेशम’ कहा जाता है, पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक वस्त्र विरासत का एक अहम हिस्सा है। इसकी खासियत यह है कि इसे तैयार करने की प्रक्रिया में रेशम के कीड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल और नैतिक फैशन का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर एरी रेशम शॉल का चयन इस बात को दर्शाता है कि भारत अपनी पारंपरिक विरासत के साथ-साथ सतत विकास को भी समान महत्व देता है।

इस बार के ‘At Home Ceremony’ की थीम पूरी तरह से पूर्वोत्तर भारत पर केंद्रित रही। समारोह स्थल की सजावट से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक, हर जगह Assam, Arunachal Pradesh, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland, Tripura और Sikkim की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण को पारंपरिक डिज़ाइनों, लोक कला और हस्तशिल्प से सजाया गया, जिससे मेहमानों को पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव हुआ।

लोकनृत्य और संगीत ने बांधा समां

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों के पारंपरिक लोकनृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दी गईं। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने मंच पर जब अपनी कला का प्रदर्शन किया, तो राष्ट्रपति भवन का वातावरण पूरी तरह सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया। इन प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि पूर्वोत्तर भारत की कला और संस्कृति कितनी जीवंत, विविध और समृद्ध है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिए जाने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक ‘At Home Ceremony’

एरी रेशम और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत रिश्ता

Eri Silk केवल एक पारंपरिक वस्त्र नहीं है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत, खासकर Assam, की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी माना जाता है। हजारों बुनकर परिवारों की आजीविका एरी रेशम के उत्पादन से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति भवन के ‘At Home Ceremony’ जैसे बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन में एरी रेशम शॉल को शामिल करना स्थानीय कारीगरों, हथकरघा उद्योग और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि राष्ट्रीय आयोजनों में स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश

President Droupadi Murmu पहले भी कई मौकों पर भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने की बात कर चुकी हैं। ‘At Home Ceremony’ में एरी रेशम का चयन उसी सोच को दर्शाता है। यह पहल न केवल पूर्वोत्तर राज्यों के लिए गर्व का विषय बनी, बल्कि पूरे देश के लिए यह संदेश भी लेकर आई कि भारत अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।

व्यंजनों में भी दिखा पूर्वोत्तर भारत का स्वाद

इस समारोह में सजावट और वस्त्रों के साथ-साथ भोजन व्यवस्था में भी थीम का खास ध्यान रखा गया। अतिथियों के लिए परोसे गए व्यंजनों में पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक स्वाद को प्रमुखता दी गई। हल्के मसालों, प्राकृतिक सामग्रियों और अनोखे स्वाद वाले इन व्यंजनों ने मेहमानों को पूर्वोत्तर की खानपान संस्कृति से परिचित कराया। भोजन के जरिए यह दिखाने का प्रयास किया गया कि भारत की विविधता केवल देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे स्वाद के रूप में भी महसूस किया जा सकता है।

President Droupadi Murmu की मौजूदगी ने बढ़ाया आयोजन का महत्व

समारोह के दौरान President Droupadi Murmu ने अतिथियों से आत्मीय मुलाकात की और उन्हें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उनकी सादगी, गरिमा और अपनापन पूरे आयोजन में साफ झलकता रहा। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की सांस्कृतिक विरासत और देश के विकास में उनके योगदान की सराहना की, जिससे इस क्षेत्र को राष्ट्रीय मंच पर और अधिक सम्मान मिला।

राष्ट्रपति भवन का ‘At Home Ceremony’ केवल एक सामाजिक या औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक भावना, एकता और सांस्कृतिक समावेशन का प्रतीक भी है। यह वह मंच है जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग एक साथ मिलते हैं और भारत की “Unity in Diversity” की भावना को मजबूती देते हैं। इस वर्ष पूर्वोत्तर भारत को केंद्र में रखकर आयोजित किया गया समारोह इस संदेश को और अधिक सशक्त बनाता है।

निष्कर्ष

77वें Republic Day की संध्या पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘At Home Ceremony’ अपने अनोखे विषय और मजबूत संदेश के कारण बेहद यादगार साबित हुआ। Eri Silk Shawl से अतिथियों का पारंपरिक स्वागत, पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की भव्य प्रस्तुति और स्थानीय व्यंजनों ने इस आयोजन को विशेष ऊंचाई दी। यह समारोह न केवल परंपरा का सम्मान था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, स्वदेशी सोच और राष्ट्रीय एकता को मजबूती से दर्शाने वाला अवसर भी बना।

ऐसी ही जानकारी के लिय हमारे सा जुड़े रहे, धन्यवाद।

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