भारत अब अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने बड़ा खुलासा किया है कि भारत इस समय करीब 50 देशों के साथ व्यापार समझौतों पर वार्ता कर रहा है, जिनमें US, EU, GCC, Israel, Canada, New Zealand और EAEU जैसे बड़े ट्रेड पार्टनर शामिल हैं। यह संख्या बताती है कि भारत एक साथ कई मोर्चों पर अपनी रणनीति को लागू कर रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था आज जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह न केवल घरेलू बाजार के लिए उत्साहजनक है, बल्कि दुनिया भर के निवेशकों और व्यापारिक साझेदारों के लिए भी एक शक्तिशाली संदेश भेजती है। वैश्विक स्तर पर जब अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएँ मंदी, महंगाई और लो-ग्रोथ जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं, ऐसे समय में भारत की GDP लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है। देश की दूसरी तिमाही की GDP Growth ने भी यह साबित कर दिया है कि भारत केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है जो आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार के केंद्र में रह सकती है।
US के साथ Trade Deal पर निर्णायक प्रगति
Piyush Goyal ने अपने बयान में India और US Trade Deal पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वार्ता अब काफी आगे बढ़ चुकी है और दोनों देशों के बीच कुल 6 राउंड की बातचीत पूरी हो चुकी है। अब पूरा फोकस इस बात पर है कि डील के पहले चरण यानी Phase-1 Agreement को इस वर्ष के अंत तक Final किया जा सके। यह डील केवल आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित होगी।
भारत और अमेरिका के बीच पहले भी विभिन्न व्यापारिक मसलों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में नया तालमेल देखने को मिला है। दोनों देशों की सरकारें समझती हैं कि वैश्विक सप्लाई चेन में चीन की निर्भरता कम करने और नए उत्पादन केंद्रों को बढ़ावा देने के लिए भारत एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में यह डील भारत के टेक, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज क्षेत्र को अभूतपूर्व गति दे सकती है।
भारत इन दिनों वैश्विक व्यापार में एक लंबी छलांग लगाने की तैयारी में है। लगभग 50 देशों के साथ चल रहे बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत अब बहु-स्तरीय वैश्विक साझेदारी का मॉडल अपनाते हुए अपने व्यापारिक अवसरों को विस्तार देना चाहता है। इन वार्ताओं का उद्देश्य केवल टैरिफ कम करना या निर्यात बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह भारत की एक ऐसी रणनीति है जिसके तहत देश को Manufacturing Hub बनाया जा सके, High-Tech Investment को आकर्षित किया जा सके और भारत को आने वाले दशक में विश्व की शीर्ष आर्थिक शक्तियों में शामिल किया जा सके।
भारत आज “China+1 Strategy” का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है। विशाल जनसंख्या, बड़े उपभोक्ता बाजार, कुशल युवा कार्यबल, स्थिर सरकार और तेजी से बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर ने भारत को दुनिया के लिए एक व्यापारिक केंद्र में बदल दिया है। यही कारण है कि Canada, Israel, New Zealand जैसे देश भारत के साथ समझौते को लेकर उत्साहित हैं। यह वैश्विक विश्वास भारत की आर्थिक मजबूती का बड़ा प्रमाण है।
इकोनॉमी की तेजी से बढ़ती ग्रोथ
भारत की आर्थिक ग्रोथ ने दुनिया भर के आर्थिक संस्थानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। IMF, World Bank, Moody’s और S&P सभी ने भारत की वृद्धि क्षमता को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। भारत न केवल महामारी के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से वापस पटरी पर ले आया, बल्कि अब वह लगातार उच्च वृद्धि दर बनाए हुए है। इसी आर्थिक मजबूती ने भारत को वैश्विक व्यापार वार्ताओं में बड़ी ताकत दी है।
भारत अपनी घरेलू नीतियों जैसे PLI Scheme, Startup Push, Digital Public Infrastructure और Logistics सुधारों के बल पर दुनिया भर की कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। बड़ी टेक कंपनियाँ भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही हैं। Semiconductor, EV Batteries, Aerospace और Defence जैसे क्षेत्रों में भी भारत तेजी से निवेश का केंद्र बन रहा है। यही कारण है कि भारत अब अकेले किसी एक देश पर निर्भर न रहते हुए, कई देशों के साथ एक साथ व्यापक व्यापारिक समझौतों पर बातचीत कर रहा है, ताकि आने वाले समय में निर्यात को और गति दी जा सके।
India-US Trade Deal से होने वाले बड़े फायदे
India-US Trade Deal अगर इस साल के अंत तक Final हो जाती है, तो इसके नतीजे भारत के लिए कई स्तरों पर लाभदायक होंगे। इस डील से सबसे पहले भारतीय Exporters को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि कई क्षेत्रों में टैरिफ कम या समाप्त हो सकते हैं। Textile, Leather, Pharma, Electronics, Engineering Goods और IT Services जैसे क्षेत्रों को इससे बड़ा बूस्ट मिलेगा। साथ ही अमेरिका से आने वाली हाई-टेक मशीनरी, घटक (components) और डिजिटल टेक्नोलॉजी सस्ती हो सकती है, जिससे भारत के उत्पादन क्षेत्र की लागत कम होगी।
दूसरी ओर, यह डील भारत में बड़े पैमाने पर FDI को आकर्षित करेगी और वैश्विक कंपनियाँ भारत में उत्पादन यूनिट स्थापित करने को प्रेरित होंगी। Supply Chain Diversification के दौर में भारत अमेरिका के लिए एक मजबूत पार्टनर बन सकता है। इससे भारत न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि रणनीतिक रूप से भी एक बड़ा वैश्विक रोल निभाएगा।
निष्कर्ष
भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रणनीति आज नए युग में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह से देश 50 देशों के साथ Trade Agreements पर बातचीत कर रहा है, वह यह दर्शाता है कि भारत आने वाले दशक में दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है।
Piyush Goyal द्वारा दिया गया अपडेट केवल एक नीति घोषणा नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसके तहत भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है। यदि इस वर्ष India-US Trade Deal Final हो जाती है, तो यह भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को और मजबूत करेगी और भविष्य में भारत को एक Global Trade Leader बनने में मदद करेगी।
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