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2025 में Chhath Mahaparva और Diwali को भारत ने UNESCO Intangible Cultural Heritage सूची के लिए किया नामांकित

इस साल भारत ने अपनी दो समृद्ध संस्कृतिक परंपराओं Chhath Mahaparva और Diwali को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत Intangible Cultural Heritage (ICH) सूची के लिए नामांकित किया है। यह कदम भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और दुनिया के सामने हमारी living traditions का गौरव पेश करता है। इस नामांकन से उम्मीद है कि इन उत्सवों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थायी सम्मान और संरक्षण प्राप्त होगा, जिससे उनकी अगली पीढ़ियों तक विरासत कायम रहेगी।

Chhath और Diwali को भारत ने UNESCO ICH के लिए किया नामांकित

सांस्कृतिक विरासत से वैश्विक सम्मान तक

भारत ने 2003 के ICH कन्वेंशन को स्वीकार करके अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा और संवर्धन का वचन दिया था। इस प्रयास का परिणाम रहा कि अब तक देश के 15 सांस्कृतिक तत्व UNESCO की Representative List में शामिल हो चुके हैं।

इस वर्ष, जब भारत पहली बार UNESCO की ICH समिति का मेज़बान बना है तो 8 से 13 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित 20वें सत्र के दौरान यह नामांकन रणनीति एक मजबूत सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा बना है।

Chhath Mahaparva और Diwali को सूची में लाने का प्रस्ताव इस विश्वास पर आधारित है कि यह उत्सव किसी धार्मिक रिवाज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता, ecological awareness और समुदाय आधारित living heritage का प्रतिनिधित्व करता है।

Chhath Mahaparva- श्रद्धा, प्रकृति, और परंपरा का संगम

Chhath Mahaparva भारत की उन प्राचीन परंपराओं में से एक है, जो पीढ़ियों से सूर्य और प्रकृति की कृतज्ञता जताने की परंपरा को संजोए हुए है। उपवास, नदी तट पर स्नान, उदित व अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने का यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामूहिक संघर्ष, धैर्य और community bonding की भावना को भी मजबूत करता है।

इस पर्व को UNESCO सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया परंपरा को संरक्षित करने का प्रयास और global cultural diplomacy का माध्यम भी है। भारत सरकार और संस्कृति मंत्रालय ने सहयोगी देशों जहाँ भारतीय प्रवासी रहते हैं, जैसे UAE, Mauritius, Fiji आदि के साथ इस नामांकन को multinational रूप देने की पहल है। इससे यह उम्मीद है कि Chhath का स्वरूप विश्वस्तरीय पहचान प्राप्त करेगा।

Chhath और Diwali को भारत ने UNESCO ICH के लिए किया नामांकित

अगर यह सफल हुआ, तो Chhath Mahaparva, भारत की विविध लेकिन एकीकृत सांस्कृतिक विरासत का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बनेगा।

Diwali: प्रकाश, संस्कृति और भारतीय सभ्यता का वैश्विक चेहरा

Diwali जिसका नाम सुनते ही उजाला, दीये, मिठाइयाँ और खुशियाँ याद आती है। यह एक त्योहार मात्र नहीं है, यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक मेलजोल और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है। जब यह त्योहार UNESCO ICH सूची में शामिल होगा, तो यह भारत के साथ विश्वभर में Indian diaspora के लिए गौरव का विषय बनेगा।

इस नामांकन का एक बड़ा उद्देश्य है कि global audience के सामने भारत की cultural soft power को उजागर किया जा सके। Diwali, अपने ritually significant, socially inclusive और joy oriented स्वरूप के कारण दुनिया के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आएगा।

2025 में इस प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, और उम्मीद है कि UNESCO की समीक्षा प्रक्रिया के बाद Diwali को ICH सूची में शामिल किया जाएगा।

UNESCO 20th ICH Session

इस साल 8 से 13 दिसंबर तक नई दिल्ली के लाल किले में UNESCO की Intangible Cultural Heritage Committee का 20वाँ सत्र आयोजित हो रहा है, जो भारत के लिए गौरव और ज़िम्मेदारी दोनों का विषय है।

इस सत्र के एजेंडा में भारत द्वारा प्रस्तुत किए गए Chhath और Diwali जैसे निवेदन प्राथमिकता पर होंगे। इससे इन उत्सवों को वैश्विक मान्यता मिल सकती है, तथा भारत की सांस्कृतिक विविधता, documentation efforts, और community involvement को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा करने का मौका मिलेगा।

यदि नामांकन सफल हुआ, तो भारत की ICH सूची में और वृद्धि होगी, जिससे हमारी living heritage का सरंक्षण और भी सुदृढ़ होगा। युवा पीढ़ियों में सांस्कृतिक संवेदनशीलता बढ़ेगी, और global perception में भी भारत की cultural identity मजबूत होगी।

नामांकन से लेकर संरक्षण तक

हालाँकि नामांकन एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके पीछे documentation, community consent, heritage safeguarding और sustainable transmission जैसी चुनौतियाँ भी आ सकती है। खासकर Chhath जैसे उत्सवों में, regional variations, rituals की विविधता और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।

इसीलिए संस्कृति मंत्रालय और संबंधित संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नामांकन सिर्फ symbolic नहीं रह जाए बल्कि real preservation model बनकर सामने आए, जिसमें local communities, practitioners, NGOs और युवा भी भागीदार हो।

यदि ऐसा हुआ, तो Diwali और Chhath महापर्व UNESCO सूची में शामिल होंगे, तथा global cultural tourism, awareness और भारत की soft power नीति में भी योगदान देंगे।

निष्कर्ष

भारत द्वारा 2025 में Chhath Mahaparva और Diwali को UNESCO Intangible Cultural Heritage सूची में नामांकित करना एक साहसिक, गर्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है। यह साबित करता है कि हमारी सांस्कृतिक विविधता आनन्द व उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी सामाजिक एकता, लोक परंपराओं और सामुदायिक जीवन का आधार भी है।

इस पहल से संभव है कि भारत की cultural heritage को वो global मंच मिले, जिसके वह हकदार है। अगर हम इस अवसर का सदुपयोग करें तो transparent documentation और समुदायों को शामिल कर सकते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित होंगी।

इसके सफलता के बाद विश्व को यह संदेश जाएगा India’s living traditions are not relics of past, they are vibrant, evolving, and worth safeguarding।

ऐसे ही और खबरों के लिए हमसे जुड़े रहें। धन्यवाद।

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