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कश्मीर की एकता के लिए साहित्य को बनना होगा नई आवाज़: जम्मू में ‘कवि सम्मेलन’ में LG Manoj Sinha का स्पष्ट संदेश

Power Grid Corporation of India Limited (PGCIL) द्वारा आयोजित ‘कवि सम्मेलन’ का मंच कला और रचना का बहुमूल्य उत्सव था, और कश्मीर की सामाजिक संरचना, युवा मानसिकता और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित एक गहन संवाद का माध्यम भी बना। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कवियों और लेखकों की भूमिका साहित्य रचना तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे समाज को जोड़ने, युवाओं को दिशा देने और विभाजनकारी ताकतों का मुकाबला करने में निर्णायक योगदान दे सकते हैं।

जम्मू में ‘कवि सम्मेलन’ में LG Manoj Sinha का स्पष्ट संदेश

LG Manoj Sinha का यह संदेश उस समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब कश्मीर घाटी के कुछ क्षेत्रों में radicalisation attempts को पराजित करने और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में व्यापक प्रयास किया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता या राजनीतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, यहां की आत्मा उसके साहित्य, कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपराओं में बसती है। कविता यहाँ की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। कश्मीरी सूफ़ी और संत कवियों की परंपरा ने सदियों तक प्रेम, शांति और एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का काम किया है।

उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कवि सम्मेलन ने कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर को एक नई दिशा दी गई। इस मंच पर साहित्य को कला के साथ सामाजिक हस्तक्षेप का प्रभावी साधन माना गया। एक ऐसा साधन जो दिलों और दिमागों तक सीधे पहुँचता हो।

LG Manoj Sinha का संदेश: “साहित्य को एकता का प्रहरी बनना होगा”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए LG Manoj Sinha ने कहा:

“Poets and writers must strengthen unity and counter secessionist attempts to divide and radicalise youth in the Kashmir valley.”

यह वक्तव्य केवल राजनीतिक टिप्पणी ही नहीं था, बल्कि यह साहित्यकारों, शिक्षकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट आह्वान था।

कश्मीर के युवाओं में सकारात्मक सोच पैदा करने की जरूरत

Manoj Sinha ने बताया कि घाटी के युवा आज तेजी से आधुनिक शिक्षा, sports, entrepreneurship और digital opportunities की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन साथ ही कुछ elements ऐसे भी हैं जो उन्हें misinformation और radical propaganda के जरिए भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। कविता और साहित्य ऐसे समय में युवाओं के मन तक पहुँचकर उन्हें सही दिशा और संवेदनशीलता दे सकते हैं।

‘कवि सम्मेलन’

साहित्य का समाज पर गहरा प्रभाव

कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं होता, यह भावनाओं को आकार देती है, सोच को नई दिशा देती है, और अंधकार में प्रकाश की तरह काम करती है। समाज में विभाजन की प्रवृत्तियों को रोकने में साहित्य की ऊर्जा किसी भी राजनीतिक रणनीति से अधिक प्रभावी हो सकती है।

कश्मीर में शांति का मार्ग सांस्कृतिक पुनर्जागरण से होकर जाता है

LG सिन्हा ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण हैं, लेकिन स्थायी शांति तभी संभव है जब समाज सांस्कृतिक रूप से मजबूत हो, और इस पुनर्जागरण का नेतृत्व कवियों, लेखकों और कलाकारों को करना होगा।

PGCIL की पहल: Corporate Social Responsibility का संवेदनशील मॉडल

Power Grid Corporation of India Limited का यह आयोजन उनके CSR Initiatives का एक ऐसा हिस्सा है, जिसके तहत वे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उपक्रमों को भी समर्थन देते हैं।

इस ‘कवि सम्मेलन’ की मुख्य उपलब्धियाँ:

PGCIL की यह पहल यह दर्शाती है कि कॉर्पोरेट संस्थाएं भी देश की सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता में सक्रिय योगदान दे सकती हैं।

कश्मीर में परिवर्तन के दौर में संस्कृति की भूमिका

कश्मीर आज बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। विकास परियोजनाएं, बढ़ता पर्यटन, नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी, डिजिटल कनेक्टिविटी और महिला-युवा सशक्तिकरण की योजनाएं घाटी में उम्मीद का नया माहौल बना रही है।

लेकिन LG सिन्हा ने यह स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक सुधार काफी नहीं है बल्कि मानसिक और सांस्कृतिक सुधार भी साथ-साथ अत्यंत आवश्यक है।

सांस्कृतिक पहल क्यों महत्वपूर्ण है?

कविता और साहित्य इन सारी प्रक्रियाओं में केंद्र में खड़े दिखाई देते हैं।

कवियों की जिम्मेदारी: सृजन के माध्यम से शांति स्थापित करना

LG Manoj Sinha ने अपने भाषण में बड़ी सहजता से लेकिन स्पष्टता के साथ कहा कि कवि और लेखक समाज का आईना ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शक भी होते हैं। कवियों और लेखकों के शब्दों से समाज में दोस्ती और एकता की धारा बहती है, गलत विचारों को चुनौती का सामना करना पड़ता है, युवाओं में भावनात्मक स्थिरता पैदा होता है, और अँधेरी सोच को उजाले में बदलने की क्षमता पैदा होती है।

‘कवि सम्मेलन’

यह वही साहित्य है जिसने भारत को कालिदास से लेकर अमृता प्रीतम तक एकजुट किया है। कश्मीर की नई कहानी भी अब शब्दों और काव्य की संवेदना से लिखी जाएगी।

निष्कर्ष

जम्मू में आयोजित ‘कवि सम्मेलन’ एक सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं, बल्कि कश्मीर की सामाजिक और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था। LG Manoj Sinha का संदेश यह स्पष्ट करता है कि कश्मीर की शांति सुरक्षा बलों का नहीं, बल्कि समाज के हर संवेदनशील वर्ग, विशेषकर साहित्यकारों का सामूहिक योगदान मांगती है।

कविता विभाजन नहीं, संवाद पैदा करती है। वह कट्टरपंथ नहीं, करुणा पैदा करती है। आज साहित्य ही कश्मीर की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कश्मीर की युवा पीढ़ी जब कविता, साहित्य और संस्कृति से जुड़ेगी, तो घाटी की वह पहचान वापस लौट आएगी जो सदियों से प्रेम, शांति और बहुलता की प्रतीक रही है।

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