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President Droupadi Murmu ने Rashtrapati Bhavan में किया Artists से मुलाकात, कला की जिंदा धड़कन और Kala Utsav की राष्ट्रीय विरासत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Rashtrapati Bhavan में आयोजित Kala Utsav Artists in Residence Programme के तहत देशभर के कुछ प्रतिष्ठित चित्रकारों, mural artist और tribal art कलाकारों से मुलाकात की और उनकी पारंपरिक paintings व murals को देखा। यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की जीवंत कलात्मक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिए जाने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

President Droupadi Murmu ने Rashtrapati Bhavan में किया Artists से मुलाकात

Kala Utsav द्वारा Rashtrapati Bhavan में कला का राष्ट्रीय संगम

Rashtrapati Bhavan की ओर से चलाया जा रहा Kala Utsav Artists in Residence Programme एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहाँ traditional और लोक कलाकारों को कुछ दिनों तक राष्ट्रपति भवन में रहने, काम करने और अपनी कला को दर्शकों के साथ साझा करने का अवसर मिलता है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य देश की विभिन्न regional art forms जैसे Madhubani, Gond, Sohrai, Pattachitra, Patua, Rogan आदि को एक उच्च मंच पर लाना है, ताकि वे आधुनिक दर्शकों से जुड़ सकें और नए पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरणा दे सकें।

इस तरह के residency model से कलाकारों को न सिर्फ national recognition मिलता है, बल्कि उनके काम को विमर्श, विमर्श सत्रों और public display के ज़रिए राष्ट्रीय धारा में भी शामिल किया जा सकता है, जिससे folk और tribal art को बस “टूरिस्ट कर्ची” बनने की बजाय living art tradition के रूप में रखने की संभावना बनती है।

Traditional Paintings और Murals से कला के ज़रिए विरासत की कहानियाँ

इस बैठक के दौरान President मुर्मू ने Madhubani, Gond, Sohrai, Pattachitra जैसे शैलियों की कलाकृतियों को विशेष रूप से देखा, जिन्हें दशकों से दूर‑दूर तक छोटे गाँवों और tribal communities में ही संजोया जाता रहा है।Madhubani चित्रकला में भगवान, प्रकृति और बाल विवाह जैसे themes के ज़रिए बिहार की सामाजिक सांस्कृतिक जड़ों को उजागर किया जाता है, तो Gond और Sohrai जैसी forms छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड के tribal life और animist cosmology को रंग रंगीले ज्यामितीय डिज़ाइन्स में ढालती है।

President Droupadi Murmu ने Rashtrapati Bhavan में किया Artists से मुलाकात

Rashtrapati Bhavan के ऐतिहासिक दीवारों और गैलरीज़ में इन traditional paintings और mural style works को लगाने से एक ऐसा विचार भी उभरता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों की नींव में जन कला और जन संस्कृति का योगदान भी शामिल है। यही दृष्टि Kala Utsav की राजनीति और सांस्कृतिक दृष्टि दोनों को नई लाइन देती है।

जीवंत कला को नीति स्तर तक खींचना

President Droupadi Murmu ने न केवल कलाकृतियों को देखा, बल्कि अपने संवाद के ज़रिए यह संदेश भी दिया कि ये लोक और tribal art forms केवल भावनात्मक अभिमान का विषय नहीं, बल्कि देश की cultural identity का बहुत बड़ा हिस्सा है। उनका कलाकारों से व्यक्तिगत बातचीत, उनकी पेंसिल स्केचिंग या canvas पर काम करते हुए उनकी तकनीक देखना और उनकी बातों को ध्यान से सुनना दिखाता है कि राष्ट्रपति का यह दृष्टिकोण top down के बजाय dialogue‑based, participatory और सम्मानपूर्ण है।

इस process से एक और ज़रूरी संदेश भी निकलता है: cultural और natural heritage को सिर्फ म्यूजियम और फ़ाइलों में बंद करने की बजाय, उसे living space, वास्तविक बातचीत और राष्ट्रीय इंस्टीट्यूशनों के ढांचे में जगह मिलनी चाहिए। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए Kala Utsav जैसे प्रोग्राम कलाकारों को financial security, public visibility और आत्मसम्मान दोनों देने की कोशिश करते हैं, जो दीर्घकालिक रूप से उनकी art forms को बचाए रखने में मदद कर सकते हैं।

भविष्य की पीढ़ी के लिए प्रेरणा और Living Heritage का संदेश

Kala Utsav का एक और महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि यह नए कलाकारों, खासकर युवाओं और students को यह समझाए कि traditional art को rigid या पुराना नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि उसे आधुनिक विषयों, नई surfaces (जैसे digital canvas, textiles, installations) और global ऑडियंस के लिए अपडेट किया जा सकता है। राष्ट्रपति के सामने खड़े होकर अपनी कला को उजागर करने वाले कलाकार अपने गाँव‑कस्बे लौटकर इस experience को अपने समुदाय में भी बाँटेंगे, जिससे छोटे‑छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी art education और cultural confidence को बढ़ावा मिल सकता है।

President Droupadi Murmu ने Rashtrapati Bhavan में किया Artists से मुलाकात

इसी तरह, एक तरफ Madhubani, Gond, Pattachitra जैसी forms अपने डिज़ाइन और रंग‑पट्टियों के ज़रिए visual heritage बनाती हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति का यह engagement उन्हें policy discourse और national narrative में लाता है। इस मिलन से यह संकेत मिलता है कि भारत की असली ताकत traditional knowledge और grassroots creativity में भी छिपी है, और उसे अब राष्ट्रीय राजनीति के बाहर नहीं रखा जाएगा।

निष्कर्ष

President Droupadi Murmu की यह बैठक Kala Utsav Artists in Residence Programme के माध्यम से दिखाती है कि कला अब सिर्फ private या regional घटना नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय आत्म पहचान का एक ज़रूरी अंग बन रही है। लोक और tribal art को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित करने का संदेश clear है कि अगर भारत विकसित राष्ट्र बनना चाहता है, तो उसकी जड़ें खुद ही आधुनिक नहीं, बल्कि पारंपरिक, जन आधारित और स्थानीय रचनात्मकता पर भी टिकी होंगी। इस तरह, Kala Utsav न सिर्फ देश की कला को चमकाता है, बल्कि उसे राष्ट्रीय और भविष्य की योजना में भी जगह देने की दिशा दिखाता है।

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