दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 2025 G20 Johannesburg Summit के Session-II को संबोधित करते हुए Narendra Modi ने वैश्विक समुदाय को नागरिक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मसलों पर तत्काल और सामूहिक कार्रवाई की दिशा में आह्वान किया। भारतीय प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से Deccan Principles on Food Security and Nutrition को Food Security की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण बताया और साथ ही भारत द्वारा स्थापित Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) और Disaster Risk Reduction Working Group के माध्यम से आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की भी अपील की।
यह संदेश इस दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण था क्योंकि इस शिखर सम्मेलन को अफ्रीका महाद्वीप में पहली बार आयोजित किया गया और यह ग्लोबल साउथ देशों की आवाज को बल देने का संकेत भी काम कर रहा है।
G20 Johannesburg का यह संस्करण Solidarity, Equality, और Sustainability की थीम के अंतर्गत चल रहा है। भारत ने इस मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रखने काम किया। प्रधानमंत्री के भाषण ने यह रेखांकित किया कि जलवायु प्रभाव, खाद्य आशंकाएँ और आपदा जोखिम अब सिर्फ राज्य स्तरीय चिंताएँ न रहकर वैश्विक सहयोग एवं समन्वित नीति निर्माण की आवश्यकता बन चुकी है।
Modi ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में तैयार Deccan Principles और Disaster Risk Reduction Working Group जैसी पहलें अब G20 के एजेंडा में मजबूती से शामिल हो चुकी है, और इसे आगे बढ़ावा देना वैश्विक हित में अत्यंत आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा: Deccan Principles का महत्व
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को सीधे खाद्य सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि यदि सभी देश मिलकर बदलते Climate के ऊपर Action नहीं लेंगे तो निश्चित ही global food supply chains अस्थिर हो सकती है। उन्होंने Deccan Principles on Food Security and Nutrition को भारत में कार्यरत एक रणनीतिक ढांचा बताया।
Deccan Principles के अंतर्गत जिन बिंदुओं पर बल दिया गया वो हैं-
- सतत कृषि प्रणालियाँ
- पोषण सुरक्षा
- value chain resilience
- climate smart food systems
ये सभी वही क्षेत्र हैं जिनमें वैश्विक दक्षिण के देश विशेष रूप से कमजोर हैं। Modi ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में इन सिद्धांतों ने G20 मंच पर खाद्य सुरक्षा और पोषण को नई दिशा दी है।
उन्होंने यह जोर दिया कि Food Security सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि equitable access, resilient supply chain और climate proof agricultural systems की भी जिम्मेदारी है। इस प्रयास में G20 देशों को साझा रणनीतियों, तकनीक एवं निवेश को आपस में मजबूत संबंध स्थापित करना होगा।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण और CDRI: Infrastructure Resilience की दिशा
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारत द्वारा गठित Disaster Risk Reduction Working Group आज G20 Johannesburg के मुख्य पटल पर है और इसके परिणाम स्वरूप आपदा सहनशील अवसंरचना (Resilient Infrastructure) के मॉडल तेजी से विकसित हो रहे है। उन्होंने विशेष रूप से Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) को उदाहरण के तौर पर पेश किया, जिसके माध्यम से developing countries को वित्त, तकनीक और कौशल विकास में सहायता मिल सकती है।
Modi ने कहा कि infrastructure planning में अब economic efficiency के साथ disaster resilience, climate adaptability और inclusive design भी जरूरी हैं। उन्होंने G20 Johannesburg में मौजूद समस्त देशों से आग्रह किया कि वे CDRI के प्लेटफॉर्म का उपयोग कर मिल जुल कर काम करें। इसमें public private partnerships, capacity building और climate smart standards भी शामिल हो सकते हैं।
G20 Johannesburg में वैश्विक साझेदारी और भारत केन्द्रीय रणनीति
समारोह में मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण One Earth, One Family, One Future और
Global South का नेतृत्व है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि G20 जैसे प्लेटफॉर्म पर भारत की पूर्व नेतृत्व भूमिका (Presidency) आज भी परिणाम दे रही है, क्योंकि New Delhi Declaration और उसके key initiatives जैसे women led development, digital public infrastructure, climate finance आदि को G20 Johannesburg Summit में echo मिला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल दक्षिण के लिए समाधान अलग नहीं बल्कि साझा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अपनी नीति दृष्टि के माध्यम से South-South cooperation को बढ़ावा दे रहा है और G20 Johannesburg के मंच से यह संदेश जोर शोर से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
भविष्य उन्मुख कदम और नीतिगत दिशा
Modi ने आगे कहा कि G20 Johannesburg में शामिल देशों को अब सिर्फ घोषणाएँ नहीं बल्कि रूपांकित कार्रवाई, परिनियोजनीय मॉडल और टाइम बाउंड परिणाम प्रदान करने होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि:
- Food systems के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्त एवं तकनीकी सहायता जुटाई जाए
- Disaster resilient infrastructure के लिए region specific मॉडल बनें
- Climate finance को billions से trillions तक ले जाना होगा, खासकर developing countries की मदद के लिए
- Emerging technologies, digital public infrastructure और AI enabled systems को कृषि, आपदा प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा में अपनाया जाए
इन दिशा निर्देशों से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत केवल अपनी रणनीति नहीं करता बल्कि वैश्विक कल्याण के लिए एक कार्य योजना प्रदान कर रहा है, जिसे वैश्विक मंच पर हर्षोल्लास के साथ अपनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
G20 Johannesburg Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक समाधान निर्माता देश के रूप में उभर रहा है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता को दोहराया।
Deccan Principles, DRR Working Group और CDRI जैसे भारत नेतृत्व वाले पहल अब वैश्विक एजेंडा का हिस्सा बन चुका है। यदि G20 Johannesburg के सभी देश इन दिशा निर्देशों पर ठोस कदम उठाते हैं, तो भारत ही नहीं बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ को लाभ का अनुभव होगा।
इस प्रकार, भारत द्वारा प्रस्तुत यह रणनीतिक दृष्टिकोण भाषण स्तर पर महत्वपूर्ण होने के साथ वास्तविक वैश्विक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बिंदु भी है। भारत की यह पहल, उसके सहयोग संकल्प और विकास दृष्टि को राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर महत्वपूर्ण स्थान दिलवा रहा है।
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