Iran में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी और लगातार गिरती Currency के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब इस्लामिक शासन के खिलाफ बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। बीते दो हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने गुरुवार 8 जनवरी की रात उस समय और उग्र रूप ले लिया, जब Iran से निर्वासित Crown Prince Reza Pahlavi ने आम जनता से घरों से बाहर निकलकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की। इस अपील के बाद देश के कई हिस्सों में भारी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आ गए, जिससे Irani Government की चिंता और बढ़ गई।
महंगाई और गिरती Currency ने बढ़ाया गुस्सा
Iran की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, कमजोर नीतियों और तेल निर्यात में आई गिरावट का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ा है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान महंगा हो गया है, जबकि आमदनी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालात ऐसे हैं कि आम नागरिकों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी आर्थिक तंगी ने जनता के गुस्से को और भड़काने का काम किया है। लोग सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतियों और इस्लामिक शासन के खिलाफ खुलकर नारेबाजी कर रहे हैं।
Prince Reza Pahlavi की अपील बनी टर्निंग पॉइंट
Iran के अंतिम शाह Mohammed Reza Pahlavi के बेटे और निर्वासित Crown Prince Reza Pahlavi की अपील को इस आंदोलन में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। सोशल मीडिया और विदेशी प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन्होंने ईरानी जनता से अपील की कि वे इस्लामिक शासन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं। उनकी इस कॉल के बाद राजधानी Tehran समेत कई बड़े शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए। सरकार विरोधी नारे, झंडे और बैनर लेकर लोग सड़कों पर उतरे, जिससे हालात तेजी से बेकाबू होने लगे।
Iran के कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। Tehran, Mashhad, Isfahan, Shiraz, Tabriz जैसे बड़े शहरों के अलावा छोटे कस्बों में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी न केवल महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा उठा रहे हैं, बल्कि सीधे तौर पर इस्लामिक शासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं।
Government का सख्त कदम, Internet और Telephone नेटवर्क बंद
हालात को काबू में करने के लिए Irani Government ने सख्त कदम उठाए हैं। Government ने देश के कई हिस्सों में Internet Services बंद कर दी हैं और Telephone Lines भी काट दी गई हैं। माना जा रहा है कि यह कदम प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी संपर्क और सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे पहले भी Iran में जब-जब बड़े आंदोलन हुए हैं, Government ने Internet Shutdown का सहारा लिया है ताकि विरोध की तस्वीरें और वीडियो दुनिया तक न पहुंच सकें।
Security Forces की तैनाती
प्रदर्शनों को दबाने के लिए Government ने बड़ी संख्या में Security Forces को तैनात कर दिया है। कई इलाकों में सड़कों को खाली कराया गया है और कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए गए हैं। Security Forces को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी तरह की अराजकता को सख्ती से रोकें। हालांकि, इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो और बयान अब भी सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
Human Rights को लेकर बढ़ी चिंता
Iran में Internet और Telephone सेवाएं बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है। कई Human Rights Organizations ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। उनका कहना है कि Government अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले भी Iran में हुए आंदोलनों के दौरान सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारी और कई लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर नजर
Iran में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों की ओर से Irani Government से संयम बरतने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की जा रही है। हालांकि, ईरानी शासन इन आरोपों को खारिज करता रहा है और इसे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताता है।
फिलहाल Iran में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। Internet और Telephone नेटवर्क बंद होने के कारण जमीनी हालात की पूरी जानकारी सामने नहीं आ पा रही है। लेकिन इतना साफ है कि महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अगर सरकार ने हालात को संभालने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
Iran में इस्लामिक शासन के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब राजनीतिक बदलाव की मांग की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। Internet Shutdown और सख्त सुरक्षा इंतजामों के बावजूद जनता का गुस्सा थमता नहीं दिख रहा, जिससे Irani Government के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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