Sri Sathya Sai Institute of Higher Learning (SSSIHL) के 44वें Convocation समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्र, छात्राओं, संकाय, अभिभावकों और अतिथियों को संबोधित करते हुए शिक्षा, सेवा और आधुनिक तकनीकी कौशल को राष्ट्रनिर्माण का बहुत महत्वपूर्ण मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि Sri Sathya Sai Baba ने ऐसी शिक्षा का सपना देखा था जहाँ Service becomes a way of life बने और ज्ञान सिर्फ परीक्षा तक सीमित न रहकर चरित्र निर्माण और समाजसेवा का माध्यम भी बने।

उपराष्ट्रपति ने नए स्नातकों से आग्रह किया कि वे AI, Big Data, Blockchain जैसे emerging technologies में महारत हासिल करें, लेकिन साथ ही National Ethos and Values को भी अपनी जड़ों की तरह संजोकर रखें।
उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य को बनाने में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है और उन्हें राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
Puttaparthi का Prasanthi Nilayam, कई दशकों से ही आध्यात्मिकता, सेवा और शिक्षा की एक अद्वितीय त्रिवेणी का केंद्र रहा है। Sri Sathya Sai Baba द्वारा स्थापित SSSIHL देश के उन चुनिंदा संस्थानों में गिना जाता है जहाँ holistic education, character development और academic excellence को समान महत्व दिया जाता है। यह 44वां Convocation समारोह न केवल स्नातकों के लिए एक नई शुरुआत का अवसर था, बल्कि शिक्षा के बदलते इस वैश्विक स्वरूप में भारत की दिशा और दृष्टि को समझने का भी मंच बना। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के भाषण ने इस आयोजन को और भी सार्थक बना दिया।
Sri Sathya Sai Baba की कालजयी विचारधारा को उपराष्ट्रपति ने किया याद
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि Sri Sathya Sai Baba का शिक्षा दर्शन पारंपरिक सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता, करुणा और सेवा को केंद्र में रखता है। उन्होंने कहा:
- शिक्षा का अंतिम उद्देश्य व्यक्ति को सिर्फ job ready बनाना नहीं होता बल्कि व्यक्ति विशेष को life ready भी बनाना है।
- ज्ञान का मूल्य तभी है जब वह समाज के उत्थान में अपनी उपयोगिता प्रस्तुत कर सके।
- Sai Baba ने character, compassion और competence को शिक्षा के तीन स्तंभ बताया था।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि SSSIHL की पहचान सिर्फ उच्च शिक्षा संस्थान की नहीं, बल्कि एक value-based learning ecosystem के रूप में किया जाता है जहाँ सेवा जीवन शैली का स्वाभाविक हिस्सा बन जाती है।
Emerging Technologies: AI, Big Data और Blockchain से भविष्य का नेतृत्व
राधाकृष्णन ने छात्रों को डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में, भारत सहित पूरी दुनिया जिन तकनीकी क्षेत्रों से संचालित होगी, उनमें प्रमुख हैं:
- Artificial Intelligence (AI)
- Big Data Analytics
- Blockchain Technology
- Quantum Computing
- Cybersecurity Systems
- Robotics and Automation
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इन emerging tech domains में महारत हासिल करें, लेकिन अपनी मूल राष्ट्रीय पहचान, संस्कार और मानवीय संवेदनाओं को भी अपने जीवन में संतुलित रुप से स्थान दें। उनके शब्दों में-
“Master the technologies of tomorrow—but let India’s ethos be your compass.”
यह संदेश भारतीय शिक्षा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जिसके अंतर्गत तकनीक और मूल्य, दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।

नए स्नातकों से आह्वान: राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी करें
उपराष्ट्रपति ने युवा स्नातकों को यह याद दिलाया कि भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ उसकी अर्थव्यवस्था, तकनीक, नवाचार और सामाजिक विकास वैश्विक नेतृत्व का रास्ता बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए स्नातकों की भूमिका इससे कहीं अधिक व्यापक है:
- वे अगले दशक में भारत की innovation economy को आकार देंगे
- ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में परिवर्तन लाने का नेतृत्व करेंगे
- Digital India, Skill India और Make in India जैसे राष्ट्रीय अभियानों में योगदान करेंगे
- सबसे बढ़कर “Service to Nation” को अपने जीवन का सिद्धांत बनाएँगे
उन्होंने कहा कि राष्ट्रनिर्माण केवल नीतियों से नहीं होता, अपितु यह तब सिद्ध होता है जब करोड़ों युवा अपने कर्म, कौशल और चरित्र से देश का भविष्य गढ़ते हैं।
SSSIHL की Academic Excellence का विशेष उल्लेख
उपराष्ट्रपति ने Sri Sathya Sai Institute की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल academic brilliance के लिए ही नहीं बल्कि character leadership में भी सदा ही अग्रणी रहा है।
उन्होंने उल्लेख किया कि:
- Institute की शिक्षण पद्धति value-oriented है
- विद्यार्थी समाजसेवा, research, sports और cultural initiatives में सक्रिय रहते हैं
- 100% रेजिडेंशियल मॉडल discipline और community living की अनूठी परंपरा को मजबूत करता है
उन्होंने यह भी कहा कि इस संस्थान से निकलने वाले विद्यार्थी देश विदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में सेवा की भावना को जीवित रखते हैं।
Global Education और Indian Values का अद्भुत समन्वय
44वें Convocation में उपराष्ट्रपति का संदेश आधुनिक वैश्विक चुनौतियों और भारतीय परंपरागत मूल्यों के बीच समन्वय बनाने पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि Globalisation ने अवसरों को विश्वस्तर पर फैलाया है, Technology ने मानवता को नए विकल्प दिए हैं परंतु Sustainable Progress केवल वही समाज कर सकता है जो अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को Global mindset अपनाने, व अपनी traditions का सम्मान करते रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने युवाओं को Technology driven innovation करने के लिए प्रोत्साहित तो किया ही साथ ही human sensitivity को प्राथमिकता देने की भी सलाह दी। यह संदेश भारतीय शिक्षा के उस दृष्टिकोण को परिभाषित करता है जहाँ modern skill set और traditional ethos मिलकर भविष्य को आकार देते हैं।
निष्कर्ष
Sri Sathya Sai Institute of Higher Learning के 44वें Convocation में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का संबोधन छात्रों के लिए प्रेरक था और राष्ट्र की युवा शक्ति के लिए दिशा सूचक भी था। उनका कहना था कि “Service must become a way of life” और “Master technology but stay rooted in India’s ethos”, जो आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
भारत जब Viksit Bharat 2047 की राह पर है, तब ऐसे नेतृत्व संदेश देश के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करने का काम करते हैं। यह Convocation समारोह इस बात का प्रतीक है कि शिक्षा का सच्चा उद्देश्य सिर्फ डिग्री अर्जित करना नहीं होता है, बल्कि सेवा, चरित्र और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का होता है।
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1 thought on ““सेवा आधारित शिक्षा ही सच्चा राष्ट्रनिर्माण”: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पुट्टपर्थी में Sri Sathya Sai Institute के 44वें Convocation को किया संबोधित”