भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं रहे, बल्कि वे अब सीधे तौर पर राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक विकास से जुड़े हुए हैं। इसी व्यापक सोच को सशक्त रूप देने के उद्देश्य से DRDO मुख्यालय और NPOL द्वारा कोच्चि में दो दिवसीय तृतीय अखिल भारतीय तकनीकी राजभाषा सम्मेलन ‘उन्मेष 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन World Hindi Day के अवसर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हिंदी भाषा की भूमिका को एक साझा मंच पर लाकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवाद स्थापित करता है।

सम्मेलन का विषय राष्ट्र के विकास में Science & Technology की भूमिका
‘उन्मेष 2026’ का केंद्रीय विषय “राष्ट्र के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका”, अपने आप में भारत की विकास यात्रा का सार प्रस्तुत करता है। नीति विशेषज्ञों के अनुसार, जब scientific innovation और technological advancement को जनसामान्य की भाषा में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, तभी उनका वास्तविक सामाजिक प्रभाव सामने आता है।
यह सम्मेलन इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें technical ज्ञान को हिंदी के माध्यम से साझा करने पर विशेष बल दिया गया है, जिससे research और innovation की पहुंच व्यापक समाज तक सुनिश्चित हो सके।
हिंदी और तकनीक विरोध नहीं, सहयोग
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि उच्च तकनीक और research केवल English centric ecosystem में ही संभव है। लेकिन ‘उन्मेष 2026’ इस सोच को चुनौती देता है। भाषाविदों और वैज्ञानिकों का मानना है कि हिंदी जैसी भारतीय भाषाएं technical communication में बाधा नहीं, बल्कि bridge का काम कर सकती है।
सम्मेलन में technical papers, presentations और discussions इस बात पर केंद्रित हैं कि किस प्रकार हिंदी को scientific documentation, defence research और innovation ecosystem का प्रभावी माध्यम बनाया जा सकता है।
वरिष्ठ नेतृत्व की सहभागिता से बढ़ा सम्मेलन का महत्व
इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की Samir V Kamat, सचिव, Defence Research and Development Department एवं अध्यक्ष DRDO की उपस्थिति ने। उनके साथ Anshuli Arya, सचिव, राजभाषा विभाग की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि यह पहल केवल एक भाषायी आयोजन नहीं, बल्कि national policy और institutional commitment का भी प्रतीक है।
अपने संबोधन में वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को हिंदी में तकनीकी लेखन, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
रक्षा अनुसंधान और राजभाषा का समन्वय
DRDO जैसे संस्थान में language policy का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यहां होने वाला research सीधे तौर पर national security और strategic preparedness से जुड़ा होता है। Experts का कहना है कि जब defence technology से जुड़ी जानकारी हिंदी जैसी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होती है, तो उससे training, documentation और inter departmental coordination अधिक सुदृढ़ होता है।

‘उन्मेष 2026’ इस दिशा में एक ऐसा मंच है, जहां defence research और राजभाषा के बीच व्यावहारिक समन्वय पर गंभीर विमर्श हो रहा है।
युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर
सम्मेलन में युवा वैज्ञानिकों, engineers और researchers की सक्रिय भागीदारी भी इसे विशेष बनाती है। उनके लिए यह मंच न केवल अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर है, बल्कि यह सीखने का भी अवसर है कि किस प्रकार complex scientific concepts को सरल और प्रभावी हिंदी में व्यक्त किया जा सकता है।
Academic observers के अनुसार, यह अभ्यास भविष्य में indigenous innovation ecosystem को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।
विश्व हिंदी दिवस और भारत की soft power
World Hindi Day के अवसर पर इस तरह का तकनीकी सम्मेलन भारत की cultural और intellectual soft power को भी रेखांकित करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत जब science और technology में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, तब अपनी भाषायी विरासत के साथ इस प्रगति को जोड़ना एक संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण माना जाता है।
Language experts मानते हैं कि हिंदी को technical domains में सशक्त बनाना भारत को ज्ञान आधारित वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाता है।
विज्ञान संचार में हिंदी की भूमिका
Science communication का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि knowledge को समाज तक पहुंचाना। यदि यह communication केवल सीमित भाषा वर्ग तक सीमित रहे, तो उसका प्रभाव भी सीमित हो जाता है। ‘उन्मेष 2026’ इस gap को भरने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जहां हिंदी को विज्ञान संचार का प्रभावी माध्यम बनाने पर विचार किया जा रहा है।
यह पहल विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों और grassroots innovators के लिए उपयोगी मानी जा रही है।
संस्थागत सोच और भविष्य की दिशा
DRDO और NPOL द्वारा इस तरह के सम्मेलन का आयोजन यह संकेत देता है कि भारतीय संस्थान अब केवल research output पर नहीं, बल्कि knowledge dissemination और language inclusivity पर भी समान रूप से ध्यान दे रहे हैं। Policy analysts के अनुसार, यह सोच long term में innovation को अधिक लोकतांत्रिक और समाजोपयोगी बनाएगी।
निष्कर्ष
दो दिवसीय अखिल भारतीय तकनीकी राजभाषा सम्मेलन ‘उन्मेष 2026’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हिंदी के संगम का एक सशक्त उदाहरण है। यह आयोजन यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्र के विकास में technology तभी प्रभावी भूमिका निभा सकती है, जब वह जनता की भाषा और समझ से जुड़ी हो।
DRDO और NPOL की यह पहल न केवल हिंदी के तकनीकी प्रयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भारत की उस सोच को भी प्रतिबिंबित करती है, जहां Science, Technology और Indian Languages मिलकर आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं।
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1 thought on “DRDO में ‘उन्मेष 2026’ देगा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हिंदी के संगम से राष्ट्र निर्माण को नई दिशा”